गंगा सफाई की यह रिपोर्ट पढ़कर आप भी कहेंगे ‘नमामि गंगे’

GANGA
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नई दिल्ली: 2014 के  लोकसभा चुनाव का एक अहम मुद्दा था गंगा की सफाई . बनारस में आय नरेंद्र मोदी ने मां गंगा के गोद में आकर सो गए .शायद  जीतने के बाद मां गंंगा ने उन्हें एक बार भी नहीं पुकारा होगा . चुनावी जुमले में पीएम मोदी ने मां गंगा को नमन करते हुए कहा था न मैं यहां खुद आया हूं, न किसी ने मुझे लाया है, मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है.” गंगा के प्रति उनकी भक्ति देखकर देश खुश हुआ था.

‘नमामि गंगे’ परियोजना रही फेल

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गंगा को साफ करने के लिए एक परियोजना शुरू किया गया था जिसका नाम  ‘नमामि गंगे’ इसकी जिम्मेदारी पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती को मिली उसे बाद अभी इसका भार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को दिया गया है. लेकिन किसी ने भी  अविरल बहने वाली गंगा को निर्मल नहीं कर सके . सब आते है और अपनी मैली हाथ धोकर निकल जाते है.

गंगा की सफाई कितनी नहीं पता सरकार को

मोदी सरकार का पांच साल होने को है लेकिन जिस गंगा मां ने उन्हें बुलाया था वह उसी तरह मैली पड़ी है. यह जानने की जरूरत है कि सरकार ने गंगा को साफ करने के लिए चार साल में आखिर किया क्या ?  एक आरटीआई  डालकर यह जानने के लिए सरकार से किसी ने जब जवाब मांगा तो सरकार साफतौर पर कह रही है कि उसे पता  ही नहीं की गंगा कितनी साफ हुई है.

गंगा पर खर्च हुए 3,800 करोड़

हाल ही में एक आरटीआई के जरीए यह खुलास हुआ है कि गंगा की सफाई के लिए अब तक सरकार ने 3,800 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है. फिर  तो यह सवाल बनता है कि क्या गंगा की जमीनी स्तर पर सफाई की गई है. गंगा मैली की मैली है लेकिन यह सवाल पैदा होता है कि इतनी बड़ी रकम कहां और किन कामों में खर्च किया गया.

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आरटीआई  के तहत नहीं मिला ब्योरा

आरटीआई याचिकाकर्ता और पर्यावरणविद् विक्रम तोगड़ कहते हैं आरटीआई के तहत यह ब्योरा मांगा गया था कि अब तक गंगा की कितनी सफाई हुई है, लेकिन सरकार इसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं करा पाई.

वो कहते हैं, “सरकार क्या इतनी बात नहीं जानती कि गंगा में गंदे नालों के पानी को जाने से रोके बिना गंगा की सफाई नहीं हो सकती. नमामि गंगा के तहत सरकार ने गोमुख से गंगा सागर तक का जो हिस्सा कवर किया है, वहां के हालात जाकर देखिए, काई, गाद और कूड़े का ढेर देखने को मिलेगा. इसी तरह आप गढ़गंगा यानी गढ़मुक्तेश्वर का हाल देख लीजिए. सफाई हुई कहां है और हो कहां रही है?”

 

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