एनडीए में ही रहेंगी जदयू, 2020 के विस चुनाव में नीतीश कुमार ही होंगे बिहार चेहरा

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नई दिल्ली। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जदयू ने साफ किया है कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) में रहते हुए ही लड़ेंगा। जदयू ने यह भी साफ किया है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही उसका चेहरा होंगे। बता दे कि ये बाते रविवार को सीटों के तालमेल और संगठन विस्तार को लेकर जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई।

इस बैठक में सीटों के तालमेल को लेकर निर्णय लेने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को सौंप दी गई हैं। बता दे कि कल के बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव पारित कर बिहार के बाहर जदयू के राजनीतिक तौर पर सक्रिय भूमिका निभाने की बात की गयी है। बता दे कि इस प्रस्ताव के अनुसार अगले साल होने वाले पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में जदयू सीमित सीटों पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगा। इस बैठक में जदयू ने भले हीं एनडीए के साथ रहने को लेकर बात कही हो। लेकिन बिहार और बिहार से बाहर पार्टी ने सांप्रदायिकता के मामले में किसी तरह के समझौते से साफ इन्कार कर दिया है।

सीटों के बंटवारे पर पार्टी की ओर से कहा गया है कि इस पर अभी किसी तरह की चर्चा नहीं हुई है। जब हमारे पास प्रस्ताव आयेगा, तब विचार किया जायेगा। पार्टी कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इस पर भी जदयू की बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई। कार्यकारिणी ने पार्टी में किसी भी तरह का फैसला लेने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अधिकृत किया है।

कार्यकारिणी में लिये गये फैसले की जानकारी देते हुए जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने बताया कि लोग कांग्रेस के साथ आने की बयान दे रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि महागठबंधन से अलग होने से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर राजद को अपने भ्रष्टाचार पर अपनी स्थित स्पष्ट करने के लिए उन्हें हस्तक्षेप करने को कहा था।

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पार्टी को भरोसा था कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राहुल गांधी किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे, लेकिन वह इस मामले में चुप रहे। उसके बाद मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देकर एनडीए के साथ सरकार बनायी। इसलिए कांग्रेस पहले राजद जैसे भ्रष्टाचारी पार्टी से अलग हो।

हालांकि, यह पूछे जाने पर कि राजद से कांग्रेस संबंध तोड़ लेती है, तो जदयू-कांग्रेस का गठबंधन संभव है, त्यागी ने कहा कि ऐसा होना संभव नहीं है। एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा और जदयू अलग-अलग पार्टी हैं। लेकिन हम अपनी विचारधारा से किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री व जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बैठक में कहा कि उनकी पार्टी को बिहार में हाशिये पर नहीं लाया जा सकता और जो लोग ऐसा सोच रहे हैं, वे खुद ही हाशिये पर चले जायेंगे। नीतीश कुमार ने जोर दिया कि वह हमेशा भ्रष्टाचार , अपराध और सांप्रदायिकता के खिलाफ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी यह टिप्पणी उनके प्रतिद्वंद्वियों के साथ-साथ सहयोगी के लिए भी संदेश है।

एक देश, एक चुनाव का समर्थन, पर बने आम राय:- प्रस्ताव में जदयू ने देश में लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर सैद्धांतिक सहमति दी है, लेकिन इसमें आनेवाली व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के साथ ही इस पर आम सहमति बनाने पर जोर दिया है। पार्टी का मानना है कि एक साथ चुनाव होने से ब्लैक मनी पर करारा प्रहार होगा। साथ ही विकास के काम अवरुद्ध नहीं होंगे, लेकिन इस पर सभी दलों से बात कर आम सहमति बनाकर व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने की जरूरत है।

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असम में नागरिकता (संशोधन) बिल का विरोध

बैठक में जदयू ने बीजेपी सरकार से असम में नागरिकता (संशोधन) विधयेक-2016 लागू करने को लेकर असहमती जताई है। जदयू के सांसद और राज्यसभा में पार्टी के उपनेता हरिवंश ने कहा कि इस विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों यथा हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों, जिन्होंने बिना वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश किया हो अथवा जिनके दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो गयी हो, को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन देने के लिए योग्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। पार्टी का मानना है कि यह विधेयक धर्म पर आधारित है और यह इसलिए हमारे संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विरुद्ध है।

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