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पटना: नीतीश कुमार को साथ आने को लेकर महागठबंधन में राजद और कांग्रेस दो टुक होते नजर आ रहा है. इस मुद्दे को लेकर काग्रेस भी आपस में सहमत नहीं है. कांग्रेम का एक खेमा नीतीश कुमार को महागठबंधन के लिए जरूरी बता रही है तो दूसरे का यह दलील है कि नीतीश पहले NDA के महागठबंधन से अलग हो फिर आगे की  बात होगी.

महागठबंधन के अन्य जो घटक दल है वह यह चाहते है कि नीतीश कुमार की वापसी इस पर हो की मुुख्यमंत्री तेजस्वी यादव हीं होंगे .

नीतीश कुमार की महागठबंधन में इससे पहले राजद के साथ छोड़ कर NDA में शामिल होने के बाद तेजस्वी ने भी कहा की नीतीश कुमार की महागठबंधन में कोई जगह नहीं है . लेकिन नीतीश कुमार की महागठबंधन में वापसी हो या न हो इसपर बयान बाजी तेज होते नजर आ रही है.  एैसे में भी यह एक बड़ा सवाल उठता है कि महागठबंधन में जदयू अगर महागठबंधन में आता है तो मुख्यमंत्री प्रत्याशी  कौन होगी ?

मुख्यमंत्री के लिए को कोई और बड़ियां चेहरा नहीं

जदयू  को महागठबंधन में आने को लेकर कांग्रेस विधायक शकील अहमद के बाद अब विधायक सुदर्शन और तौसीफ आलम ने कहा कि राजद या कांग्रेस में मुख्यमंत्री के लिए एैसा कोई चेहरा नहीं है . जिसे बनाया जाए. महागठबंधन में तेजस्वी को मुख्यमंत्री के पद को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से खारिज किया.

उनका कहा है कि राजद और कांग्रेस को पुरानी बातो को भूलकर आने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हराना है तो महागठबंधन में नीतीश कुमार के साथ दरकार करना चाहिए . बिहार के लिेए नीतीश कुमार से बढ़िया को और मुख्यमंत्री नहीं हो सकता.

कांग्रेस विधायक तौसीफ आलम का कहना है कि  आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी से लड़ाई सीधे है नीतीश कुमार अगर महागठबंधन में आते है तो इससे मजबूती मिलेगी. इसलिए नीतीश का महागठबंधन में स्वागत होना चाहिए .

विधायको का हैं  व्यक्तिगत राय

कांग्रेस के प्रभारी कौकब कादरी ने कहा कि दोनो विधायकों का अपना व्यक्तिगत राय हो सकता है लेकिन यह फैसला लेने का अधिकार सिर्फ आलाकमान को है . प्रदेश अध्यक्ष और बड़े नेताओें बैठे नेेता इसका तय करेंगे. दूसरा कोई क्या बोलता  है एेसे में यह बात कोई मायने नहीं रखता.


    

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