पृथक मिथिला राज्य के गठन के लिए 11 को दिल्ली में विशाल धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम : डाॅ बैजू

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वरुण ठाकुर की रिपोर्ट-
शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा0 बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि सांस्कृतिक संपन्नता के लिए संसार भर में विख्यात मिथिला आज सरकारी अपेक्षाओं के कारण लगातार आर्थिक पिछड़ेपन का शिकार होने को मजबूर हो रही है । नतीजा है कि जिस क्षेत्र के गांव-गांव में कभी शिक्षा का केंद्र हुआ करता था, आज वहां के छात्र पलायन को मजबूर हो रहे हैं। बाढ़ की जिस विभीषिका को हमारे पुरखों ने देखा। आज हमलोग भी इससे तबाह हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ी भी इससे अछूती नहीं रहेगी यह निर्विवाद सत्य जान पड़ता है। क्योंकि बाढ़ के निदान का भरोसा देकर सिर्फ और सिर्फ मिथिला को ठगा जाता रहा है।
देखा जाए तो जब इस क्षेत्र पर बाढ़ का कहर नहीं होता तो उस समय इस क्षेत्र पर सूखे का प्रहार होता है। बावजूद इसके मिथिला सूखा और बाढ़ कि कोढ का निरंतर शिकार होता आ रहा है और इसके आस पास आंसू पोछने वाला कोई नहीं है। जहां एक और खेती चौपट हो गई है, वहीं मिथिला के मजदूर पलायन करने को विवश हो रहे हैं। रोजगार के अभाव का दंश झेलने के लिए भी यह क्षेत्र कम मजबूर नहीं हो रहा। देखा जाए तो चीनी मिल, पेपर मिल, जूट मिल आदि यहां कबार का ढेर मात्र बने हुए हैं। मिथिला की प्रतिभा रोटी के लिए विभिन्न प्रदेशों में मजदूरी करने को विवश है। बिजली के लिए यहाँ के लोग अभी भी तरस रहे हैं । भाषा-साहित्य का विकास संरक्षण के अभाव में प्रभावित हो रहा है। मैथिली के प्रति सरकारी स्तर पर षड्यंत्र चल रहा है। ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक स्थल पर्यटन केंद्र की अर्हता रखते हुए भी इन्हें पर्यटन के दृष्टिकोण से उपेक्षित किया जा रहा है। सरकार की नजर में जैसे मिथिला क्षेत्र उसका अंग ही नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार के गठन में यहां के लोगों का बहुत बड़ा अवदान रहते हुए भी राजनीतिक दृष्टि से इसे पूर्णतः अलग करके रखा गया है। अष्टम अनुसूची में सम्मिलित बिहार की एकमात्र भाषा मैथिली की प्रगति में बाधा उत्पन्न किया जा रहा है। मैथिली को प्राथमिक शिक्षा का अनिवार्य माध्यम बनाए जाने की दिशा में न्यायादेश तक की सोची-समझी राजनीति के तहत अवहेलना की जा रही है और मैथिली के शिक्षकों की बहाली में कोताही बरती जा रही है।
अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति इन सभी समस्याओं के एकमात्र निदान के लिए पृथक मिथिला राज्य के पुनर्गठन को अवश्यंभावी मानती है। क्योंकि मिथिला अनादिकाल से अपना स्वतंत्र परिचय रखते आई है। इतिहास गवाह है कि अतीत में मिथिला की अपनी स्वाधीनता और अपनी स्वाधीन सत्ता थी। समिति का मानना है कि वर्तमान समय में मिथिला के समग्र विकास के लिए पृथक मिथिला राज्य का गठन आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य है । समिति इसके लिए संघर्षशील है और मिथिला की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक और भाषिक क्षेत्र में समग्र विकास के लिए मिथिला से लेकर संसद तक आंदोलन चलाती आ रही है और पृथक मिथिला राज्य के गठन तक यह अभियान अनवरत चलता रहेगा ।

 

 

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इसी क्रम में आगामी 11 दिसम्बर 2018 को दिल्ली में विशाल धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। जिसमें मिथिला के विभिन्न हिस्से के लोगों सहित प्रवासी मैथिल भी भाग लेंगे । समिति सभी मिथिला वासी, मिथिला-मैथिली सेवी संस्था, सभी राजनीतिक दलों के नेता, राजनीतिक संगठन आदि से आह्वान करती है कि प्रस्तावित धरना प्रदर्शन में सहभागी बनकर पृथक मिथिला राज्य को पुनर्स्थापित करने के लिए एकजुट हों।
राज्य सरकार से दरभंगा में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित करने के लिए निरंतर आग्रह किया गया है। लेकिन इस मांग को भी वर्षों से उपेक्षित किया जा रहा है। समिति केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह करती है कि वह मिथिला वासी के धैर्य की परीक्षा लेना छोड़ कर अविलंब चिर प्रतीक्षित मांगों यथा, मिथिला के समग्र विकास के लिए अविलंब पृथक मिथिला राज्य का गठन, केंद्र और राज्य सरकार सभी कार्यालय में मैथिली अनुवादकों की बहाली, मैथिली में प्राथमिक शिक्षा की अनिवार्यता, मिथिला के सभी रेलवे स्टेशनों पर मिथिलाक्षर में नाम पट्ट लगाने के साथ ही वहां मैथिली भाषा में उद्घोषणा की व्यवस्था सुनिश्चय, दरभंगा में हाईकोर्ट के स्पेशल बेंच की स्थापना, बाढ़ और सूखे का स्थाई निदान, बंद पड़े चीनी मिल, जूट मिल, कागज मिल आदि को चालू करने के साथ-साथ नए उद्योगों की स्थापना कर रोजगार सृजन, मिथिला को शिक्षा का हब बनाकर छात्रों के पलायन पर अविलंब रोक, आकाशवाणी दरभंगा से समस्त प्रसारण मैथिली भाषा में करने, मिथिला में दूरदर्शन प्रसारण के पृथक केंद्र की स्थापना, आकाशवाणी, दरभंगा में समाचार एकांश स्थापित कर प्रादेशिक समाचार के साथ-साथ मैथिली में भी समाचार का प्रसारण आदि शामिल है। उन्होंने कहा कि उपर्युक्त मांगों की पूर्ति नहीं होने की स्थिति में समिति आंदोलन को और धारदार बनाएगी ।

सीबीएसई मे मौजूदा सत्र से ही शामिल होगी मैथिली : हीरा
पूर्व केन्द्रीय मंत्री पद्मश्री डॉ सी पी ठाकुर का आगामी 16 दिसम्बर को नागरिक अभिनंदन

22-23 दिसम्बर को नेपाल मे होगा अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का भव्य आयोजन. प्रेस वार्ता में महात्मा गाँधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा ने जानकारी दी कि मणिकांत झा के नेतृत्व मे दिल्ली गये तीन सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल के साथ शुक्रवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री पद्मश्री डॉ सी पी ठाकुर ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात कर मौजूदा सत्र से ही इसे पाठ्यक्रम मे शामिल किए जाने की मांग की। जिसे उन्होंने तत्काल हरी झंडी दे दी है। उन्होंने बताया कि सीबीएसई पाठ्यक्रम मे मैथिली को शामिल कराने मे प्रभावकारी भूमिका निभाने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री पद्मश्री डॉ सी पी ठाकुर का आगामी 16 दिसम्बर को महात्मा गाँधी शिक्षण संस्थान में नागरिक अभिनंदन किया जाएगा जबकि 22-23 दिसम्बर को नेपाल मे अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाएगा।

 

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मिथिलाक्षर साक्षरता सम्मान समारोह’ 9 को
सम्मेलन मे नासिक से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश के संपादक एवं मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के संस्थापक पं अजय नाथ झा शास्त्री ने 9 दिसम्बर को दरभंगा मे आयोजित हो रहे ‘पाँचवें मिथिलाक्षर साक्षरता सम्मान समारोह’ के बारे मे बताया कि सोशल मीडिया पर लग रही मिथिलाक्षर की पाठशाला के माध्यम से 90 दिन का पाठ्यक्रम पूरा कर उच्च वर्ग की परीक्षा में उत्तीर्ण देश के विभिन्न हिस्सों से आये अभियानी को प्रमाण पत्र प्रदान करने के साथ ही अभियानियों को विभिन्न कोटि के सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम मे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति डा0 सुरेन्द्र कुमार सिंह मुख्य पाहुन होंगे जबकि शिक्षा, साहित्य व सामाजिक क्षेत्र की अनेक हस्ती विशिष्ट पाहुन के रूप मे इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। मिथिलाक्षर साक्षरता के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार को भव्य शोभा यात्रा निकाली जायेगी