जुमला नही जबाब दो पांच साल का हिसाब दो नारा के साथ आइसा का चौथा जिला सम्मेलन सम्पन्न !

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वरुण ठाकुर रिपोर्ट-

जुमला नही जबाब दो-पांच साल का हिसाब दो नारा के साथ शिक्षा व रोजगार पर बढ़ते हमले के दौर में आइसा का चौथा जिला सम्मेलन आज बाबा नागार्जुन नगर, कॉमरेड विशेश्वर माझी सभागार, कॉमरेड उमेश यादव मंच एमएमटीएम कॉलेज, दरभंगा में आयोजित की गई। सम्मेलन की अध्यक्षता विशाल माँझी, प्रिंस कर्ण,मयंक कुमार यादव,सब्बाना खातून,गुंजन कुमारी की पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने किया।
सम्मेलन का संचालन आइसा जिला संयोजक संदीप कुमार चौधरी ने किया।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भाकपा(माले) के वरिष्ट नेता भूषण मंडल ने कहा कि पिछले साल छात्र संघ चुनाव हुए थे और जो प्रतिनिधि जीते वह कभी छात्र के मुद्दे पर नही बोला। इसलिए इस बार छात्र संघ चुनाव में वैसे फासीवादी छात्र संगठन को धूल चटाने की जरूरत है और वैसे शक्ति को परास्त करने की जरूरत है।

वही मुख्य अतिथि के बतौर भाकपा(माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहा कि मोदी सरकार देश की शिक्षा को कॉरपोरेट के हाथों सौपकर शिक्षा को बर्बाद करने के लिए निरंतर प्रयासरत है जिसका छात्र संगठन आइसा लगातार विरोध कर रहा है।उन्होंने छात्र-छात्राओं से आवाहन करते हुए कहा कि आने वाले समय मे जुमला नही जबाब दो पांच साल का हिसाब दो नारा को बुलंद करते हुए संघर्ष में उतर जाने की जरूरत है।

 

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वही अतिथि के बतौर जसम के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य प्रोफेसर सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है तब से शिक्षा व रोजगार पर हमला तेज हुआ है। शिक्षा व रोजगार पर हो रहे हमले के खिलाफ मोदी सरकार को गद्दी से उखाड़ फेंकने की जरूरत है। संबोधित करते हुए इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष नेयाज अहमद ने कहा कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की स्थिति खराब होती जा रही है विश्वविद्यालय के अंतर्गत महाविद्यालय में परमानेंट प्रोफ़ेसर रहते हुए अंशकालीन प्रोफेसर प्रधानाचार्य बने रहती है जो विश्वविद्यालय के नियम का उल्लंघन है जिसके खिलाफ आइसा लगातार संघर्षरत है।वही उन्होंने कहा कि एमएलएसएम कॉलेज के प्रोफेसर अनिल चौधरी के द्वारा छात्रा से छेड़खानी की जांच आइसा के आंदोलन पर हुई लेकिन आज तक प्रोफेसर की गिरफ्तारी या बर्खास्तगी नही हुई है जिसके खिलाफ इंसाफ मंच आइसा के साथ आंदोलन तेज करेगा।

संबोधित करते हुए प्रोफ़ेसर कल्याण भारती ने कहा कि 1974 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था जिसके खिलाफ उस वक्त जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर हमलोगों ने छात्र जीवन के समय आंदोलन में शामिल होते हुए जेल तक का सफर तय किया आज का दौर अघोषित आपातकाल का है अभी के छात्रों को आइसा के नेतृत्व में बड़े आंदोलन की ओर बढ़ना चाहिए।
सांगठनिक सत्र में विदाई कमिटी की रिपोर्ट आइसा जिला संयोजक संदीप कुमार चौधरी ने पिछले कार्यकाल के रिपोर्ट से सदन में पेश किया जिस पर बहस के बाद पास कर दिया है वही सम्मेलन से 25 सदस्यीय नई जिला कमिटी का प्रस्ताव दिया। जिसे ताली बजाकर सदन से पारित कर दिया । सम्मेलन से अध्यक्ष के रूप में प्रिंस कुमार कर्ण व सचिव के रूप में विशाल माझी को चुना गया।उपाध्यक्ष के रूप में रमण कुमार निराला, जगदम्बा प्रसाद,गुंजन कुमारी, निशा कुमारी तथा सह सचिव के रूप में राजू कर्ण, शबाना खातून, रिद्धि रानी, मोहम्मद तालिब को चुना गया। कमिटी सदस्य के रूप मयंक कुमार यादव, मृत्युंजय कुमार, राहुल राज, आमोद कुमार अमन, उज्वल सिंह, घनश्याम कुमार, रौशन कुमार, गोबिंद कुमार, सुनील कुमार, जितेंद्र कुमार, मोहम्मद सहाबुद्दीन, आशीष कुमार, सुमन कुमार झा, ललन कुमार यादव, अमन कुमार को चुना गया।

सम्मेलन की समाप्ति सत्र को संबोधित करते हुए आइसा के राज्य सह सचिव संदीप कुमार चौधरी ने कहा कि आइसा ने स्थापना काल से शिक्षा, प्रगति,जनवाद के लिए संघर्षरत रहा है।जिसे नई जिला कमीटी को मजबूती से आगे बढ़ना है।सम्मेलन को अखिल भारतीय किसान सभा के जिला सचिव रोहित सिंह,आइसा के पूर्ब राज्य परिषद सदस्य संतोष यादव ने भी संबोधित किय।सम्मेलन में भाकपा(माले) जिला स्थायी समिति सदस्य अशोक पासवान,ऐपवा जिला सचिव सनीचरी देवी,राशिदा खातून,अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष शिवन यादव,राजन कुमार,धीरज झा,जैस्मीन,बेबी कुमारी,पिंकी,सब्बनुर खातून,शिमा कुमारी,निशा कुमारी,,अंशु कुमारी,ब्रजेश यादव,सुमित कुमार,रौनक कुमार,भूषण झा,प्रवीण झा,छोटे लाल दास,श्रीराम झा,सत्यनारायण कुमार,मो छोटे खान सहित सैकड़ो छात्र-छात्रा मौजूद थे।