बेरोजगार अभियंता महासभा के आयोजन में राज्यभर के सैकड़ो इंजीनियर ने भाग लिया

Btech student
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वरुण ठाकुर की रिपोर्ट-

तकनीकी छात्र संगठन के बैनर तले आज बिहार अभियंता संघ के कार्यालय में बेरोजगार अभियंता महासभा का आयोजन किया गया। इस बैठक में राज्यभर से सैकड़ो इंजीनियर आये थे। इस बैठक में सरकार की बीटेक विरोधी नीतियों के खिलाफ बात की गई। जिसमे उच्च शिक्षा को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है।
तकनीकी छात्र संगठन के राष्ट्रीय संयोजक सौरभ कुमार पटेल ने संबोधित करते हुए कहा कि संगठन के बैनर तले सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ कई आंदोलन किये गए हैं। 26 अगस्त 2016 को पीएचइडी की जूनियर इंजीनियर की बहाली में से बीटेक अभ्यर्थियों को हटाने के विरुद्ध आंदोलन किया गया। फिर 2018 में बीएसपीएचसीएल में 495 जेई की बहाली में से बीटेक को फिर से हटा दिया गया ।ज्ञात हो कि 2016 में जेई की बहाली में बीटेक को भी मौका दिया गया था। इससे सरकार की साज़िश और उच्च शिक्षा हासिल किए बीटेक अभ्यर्थियों के खिलाफ साफ पता चल रही है।
संगठन की प्रदेश अध्यक्षा सुष्मिता कुमारी ने कहा कि बीएसपीएचसीएल मामले को माननीय उच्च न्यायालय में ले जाया गया

 

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और वहां से 26/07/2018 को अपने फैसले में कोर्ट ने बीटेक को भी फॉर्म भरने के लिए योग्य करार किया लेकिन उसके बाद भी फॉर्म नही लिया गया। उसके बाद तकनीकी सहायक की बहाली में भी बीटेक को हटा दिया गया। ये मामला भी उच्च न्यायालय पहुचा लेकिन 79A नियम और कैबिनेट के फैसले का हवाला देकर इसे कोर्ट से खारिज कर दिया गया। एक तरफ़ जेई की बहाली से बीटेक को उच्च शिक्षा के नाम पर हटाया जा रहा है और वही लेखपाल की बहाली में उच्च शिक्षा हासिल किए गए अभ्यर्थियों को बोनस अंक दिया गया है।वही राष्ट्रीय महासचिव यशवीर राज ने सरकार पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि पहले बीटेक और डिप्लोमा में फूट डाला गया और उन्हें आपस मे लड़ाया गया। फिर सराकर तकनीकी सेवा आयोग का गठन की ताकि बहाली जल्दी की जा सके। लेकीन इसमें भी बिहार से और बिहार के बाहर से बीटेक किये छात्रों को आरक्षण के नाम पर बाँटने की कोशिश की गई। साथ ही अंक आधारित बहाली की व्यवस्था की गई जो पूरी तरह से गलत है।ऐसे में सबको मौका नही मिलेगा। राजस्व विभाग के बंदोबस्त पदाधिकारी के बहाली में बीटेक को लिया गया लेकिन उसमें 2 साल का अनुभव मांगा जा रहा है।

 

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पूरे बिहार में लगभग 6 लाख इंजीनियर बेरोजगार हैं ऐसे में अनुभव की मांग करना एक तरह से गुमराह करने की कोशिश है। कॉन्ट्रैक्ट पर बहाली में गेट स्कोर को मान्यता देना भी गलत है। पहले भी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ये स्पष्ट कर चुकी है कि गेट स्कोर उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए नामांकन लेने और शोध आदि क्षेत्रों में जाने के लिए है। यहाँ तक कि सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज ने भी अपने एक नोटिफिकेशन में कहा था कि गेट स्कोर एमटेक में नामांकन के लिए है नाकि जॉब के लिए। इसके मद्देनजर सराकर को गेट स्कोर पर नौकरी देना गलत है और यह शीक्षा के बाज़ारीकरण को बढ़ावा देने का काम है। उसी प्रकार अतिथि शिक्षक की बहाली में भी पहले सारे जिले में फॉर्म भरा लिया गया फिर बीटेक अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया।।
मौके पर संगठन के राष्ट्रीय सचिव दीपक गुप्ता सैकड़ो बीटेक अभ्यर्थी एवम अन्य समान्नित इंजीनियर और शिक्षाविद उपस्थित थे।