आजादी के दीवानों की शहादत स्थल पर डीएम’ एसपी ‘एसडीएम ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी!

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मोहम्मद हसनैन की रिपोर्ट :-

शिवहर, ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी याद करो कुर्बानी प्राय: राष्ट्रीय त्योहारों पर गाए जाने वाला यह राष्ट्रीय गीत तरियानी छपरा के शहीदों के लिए याद दिला रही है। जिला पदाधिकारी अरशद अजीज, पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी मोहम्मद आफाक अहमद ,तरियानी छपरा के स्थानीय मुखिया श्याम बाबू सिंह, प्रखंड प्रमुख मुन्नी सिंह के पति बैकुंठ कुमार सिंह सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों के वंशज तरियानी छपरा में शहीद स्थल पर एक कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों के प्रति श्रद्धा सुमन के पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी गई है। गौरतलब हो कि 30 अगस्त 1942 इतिहास के पन्ने में दर्ज है एक ऐसी तारीख जिसने सन 1942 में न केवल अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी अंग्रेजो ने शिवहर जिला के तरियानी छपरा गांव में धावा बोलकर देश की आजादी के जंजीरों से मुक्त कराने के लिए शाम में एक सभा कर रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर ठीक उसी तरह गोलियां बरसाई थी जैसे पंजाब के जालियावाला बाग में गोलियां चलाई थी। अंग्रेज की गोली से 10 जिले के सपूतों की मौके पर जान चली गई कई घायल हुए तरियानी छपरा के ही बलदेव शाह, सुखन लोहार ,बंसी ततवा, परशत साह, सुंदर महरी, हरि प्रभु साह,जयमंगल सिंह ,सुखदेव सिंह, भूपन सिंह एवं नवजात सिंह शहीद हो गए थे। लेकिन इससे पहले वीर सपूतों ने अंग्रेजों की नींव हिला दी थी उस समय भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था तो इस इलाके में भी आंदोलन चरम पर था शिवहर जिला उस वक्त सीतामढ़ी के साथ मुजफ्फरपुर जिला था 30 अगस्त 1942 को आजादी का सपना संजोए जिले के छपरा के जावांज सपूतों ने बेलसंड

 

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तरियानी के बीच बागमती नदी पर अवस्थित मारड पुल को भी ध्वस्त कर दिया था। क्रांतिकारियों में धनेश्वर झा, ठाकुर प्रसाद सिंह, पवन धारी परसाद, बलदेव शाह, सुगन लोहार ,जय मंगल सिंह ,सुखदेव सिंह ,गोपाल सिंह जैसे आधा सैकड़ा स्वतंत्रता सेनानियों ने हमला कर भाग निकले थे । सभी लोग तरियानी छपरा गांव में अंग्रेजों के खिलाफ अगली रणनीति तय कर रहे थे इसी बीच अंग्रेज सिपाहियों ने हमला कर 10 सपूतों को जान ले ली थी, आज भी तरियानी छपरा गांव में बांध के किनारे उन महान देश भारत शहीदों का स्मारक है। तत्कालीन जिला पदाधिकारी राजकुमार, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रकाश नाथ मिश्रा के अथक प्रयास से आजादी के दीवानों की शहादत स्थली को कायाकल्प किया गया है।  महान स्वतंत्रता सेनानियों की शहीद स्मारक तरियानी छपरा वासियों के लिए जो ना केवल युवा पीढ़ीयो के लिए प्रेरणा का स्रोत है बल्कि गुलाम की दासता से देश को मुक्ति दिलाने के लिए दी गई कुर्बानियों को याद दिला रहा है।वैसे 1942 सीतामढ़ी शिवहर सुर्खियों में रहा इस तरह मुकुल 213 वीर सपूत गिरफ्तार हुए जिसमें 180 को जेल में बंद कर दिया गया ,चार फिरंगी मौत के घाट उतारे गए, 12 सपूतों को इसकी कीमत प्राणों की आहुति देकर चुकानी पड़ी थी। आज तरियानी छपरा गांव में एक कार्यक्रम आयोजित कर आजादी के दीवानों को शहादत स्थली पर जिला प्रशासन एवं जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। इस बाबत तरियानी छपरा के मुखिया श्याम बाबू सिंह उनके पुत्र अमित कुमार सिंह , समाजसेवी मुकेश सिंह छपरा ग्रामीण वासी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता संहिता स्थल पर जाकर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दिए हैं ।