घर का कूड़ा पोखर तालाब नदी में न डाले इससे पानी की सेल्फ क्लीनिंग कैपिसिटी कम होती है जो इको सिस्टम को प्रभावित करता है।

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मोहम्मद हसनैन की रिपोर्ट-

शिवहर , छठ पर्व का चंद दिन रह गए , नगर प्रशासन घाटों की साफ-सफाई में लगी है फिर भी लोगों की मानसिकता वही पुरानी बनी है, पछियारी पोखर जहां शहर के आधे आबादी से ज्यादा लोग छठ पर्व करते हैं जिस तालाब दीपावली पुजा की सारे कुंडा करकट को लोग डाल दिया तालाब में , आखिर लोगों की मानसिकता को कैसे ठीक करेगा नगर पंचायत,एक बड़ा सवाल पुछा है ग्रामीण द्वारा दुर्गा पूजा और दीपावली समाप्त हो चुकी है इस दुर्गा पूजा और दीपावली में लोगों ने बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया पूजा-अर्चना की सुख समृद्धि की कामना की, घर को अच्छे से सजाया गली मोहल्ला साफ किया , क्या बस घर को साफ कर लेना ही सफाई का उदाहरण है इसका जवाब है नहीं। क्योंकि जब तक हमारे आसपास सफाई नहीं होगी , सही मायने में हम स्वच्छ और रोग मुक्त नहीं हो पाएंगे ।

 

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एक ऐसा उदाहरण बनता हुआ शिवहर जिले के पछियारी पोखर जो शिवहर नगर पंचायत का सबसे बड़ा पोखरा है। लेकिन आज की स्थिति यह है कि  वह पोखर कचरा में तब्दील हो चुका है । पोखर के चारो तरफ गंदगी ही गंदगी है फैला हुआ है। कुछ दिनों में हिंदुओ का महापर्व छठ पूजा नजदीक है। घर का कूड़ा पोखर तालाब नदी में न डाले इससे पानी की सेल्फ क्लीनिंग कैपिसिटी कम होती है जो इको सिस्टम को प्रभावित करता है। बस अपने घर को साफ कर लेना सफाई नहीं है ,क्योंकि इको सिस्टम में हमारे आस पड़ोस की जितनी चीज है सारे आते हैं। यदि इकोसिस्टम का एक भी चीज डिस्टर्ब होगी, उसका असर सीधे हम सबों पड़ेगा।घर के जितने भी कुडे होते है सब को ले जाकर नदी नाले मे डाल देते है एसा कहना है

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ग्रामीणों का और पोखर के पानी को प्रदूषित कर रही है।इस पोखर के पानी को देख कर एसा लग रहा है के पोखर को लोगों ने कुडेदान समझ कर कुडे डाल दिया हो जिशे पोखरे का पानी को प्रदूषित करता है। जो उसमें रहने वाले जलीय जीव है वो सेहत  पर प्रभाव डालता है।

पानी का एक गुण होता है सेल्फ क्लीनिंग की । लेकिन आज के युग में केमिकल के अधिक उपयोग होने से सेल्फ क्लीनिंग कैपेसिटी घटती जा रही है इसका जिम्मेदार कोई नहीं हम इंसान खुद है जो इसका जिम्मेदार