अनाथ शिवहर को क्रांतिवीर की तलाश

Sheohar
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कुछ दिन पूर्व कमरौली निवासी दीपक वर्मा जी को बिहार का प्रधान सचिव बनाया गया। उसके कुछ दिन बाद कल्पना कुमारी ने नीट तथा इंटर में प्रथम स्थान प्राप्त कर पूरे विश्व पटल पर शिवहर को एक स्थान दिलाने का काम किया। कल्पना कुमारी पूरे देश में जिले का तथा राज्य का भी नाम रोशन किया है लेकिन सरकार द्वारा अब तक उन्हें सम्मानित नहीं किया गया है। हां जिले को जरूर सम्मानित किया गया पर डिग्री कॉलेज छीन कर।

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इन दो सफलताओं के बाद शिवहर के आम लोगों में जो किसी पार्टी के नहीं है एक उम्मीद जगी। लोगों को लगा कि यहां के बाद शिवहर में एक नया परिवर्तन आएगा। वह तमाम सुविधा शिवहर को मिलने लगेगी जिसका वह हकदार है क्योंकि दिल्ली के सल्तनत पर बैठे हुए मोदी जी और बिहार के शासक नीतीश जी की नजर में शिवहर दिखेगा लेकिन हर बार की तरह फिर से आम लोगों के हिस्से बस हमेशा की तरह फिर से धोखा आया। पिछले कुछ वर्षों से शिवहर में डिग्री कॉलेज का आंदोलन हो रहा था मीडिया के लोगों का इस आंदोलन में भरपूर सहयोग था। दरअसल जिले के युवा तथा मीडिया के लोग संयुक्त रूप से आंदोलन चला रहे थे और तत्कालीन जिला पदाधिकारी के अथक प्रयास से डिग्री कॉलेज खोला गया था जिसमें 431 बच्चों का नामांकन तथा पंजीयन भी हुआ। इसके उद्घाटन समारोह में स्थानीय विधायक सांसद तथा पूर्व के जनप्रतिनिधि के अलावा प्रभारी मंत्री बिहार यूनिवर्सिटी के कुलपति तक आए। कहा जा सकता है कि 2 बार भव्य कार्यक्रम हुआ एक उद्घाटन के दौरान दूसरा सत्र के शुरुआत होने पर इन तमाम घटनाक्रम के बाद भी संभवत: बिहार की सल्तनत पर बैठे लोगों का नजर नहीं पड़ा होगा। यही कारण है कि अचानक से पटना से फरमान आया कि डिग्री कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधि को रोक दिया जाए। युवा जो इस संघर्ष के साथी थे वह बेचैन हो उठे लेकिन शिवहर के एक बहुत बड़ा वर्ग पर कोई फर्क नहीं पड़ा। कारण खुद में इतना व्यस्त है कि उनको फर्क नहीं पड़ता है। यही एक बड़ा कारण है कि जिले में सियासत करने वाले लोग उनके इस खामोशी का फायदा उठाते हैं। हमारे जिले के सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकतर नेता खुद में मस्त हैं। उनको भी फर्क नहीं पड़ता है कि जिले का विकास कैसे हो हालांकि इन सबके बावजूद भी कुछ जागरूक युवाओं ने सवाल उठाया लेकिन किसे फर्क पड़ता है। युवाओं के सवाल उठाने पर क्योंकि जिले के तमाम नेता के पास एक आंकड़ा है। जातिगत आंकड़ा, धार्मिक आंकड़ा। उन्हें पता है कि जिले के लोग का भावना बस जाति के आधार पर या फिर धर्म के आधार पर भड़काया जा सकता है। जिला या फिर राज्य में विकास के नाम पर वोट नहीं होता है।

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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया। जहां तक हम समझ पा रहे हैं हमें लगता है कि हमारे तथाकथित रहनुमा चाहे वह सत्ता में हो या विपक्ष में हो, दिल्ली या पटना तक शिवहर के विकास की बात को संभवत पहुंचाते नहीं होंगे और उनके व्यवहार से कहीं ना कहीं सत्ताधीशों को यह एहसास होगा कि शिवहर के लिए कोई लड़ने वाला नहीं है क्योंकि यह अद्भुत घटना है डिग्री कॉलेज खोलकर बंद करने का। जबकि 431 बच्चे का भविष्य दांव पर है। तमाम पहलुओं पर गौर करने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि दिल्ली और पटना के सल्तनत पर काबिज सत्ताधीश को यह पूरी तरह एहसास हो चुका है कि जिले के विकास के लिए लोगों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं है अर्थात जिला अनाथ है! गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया प्रोजेक्ट में बिहार के कुछ पिछड़े जिलों को शामिल किया गया लेकिन वहां भी शिवहर का स्थान नहीं था कारण चाहे जो हो लेकिन बड़ा सच यह हैं कि जिले के लोगों के साथ लगातार क्रूर फैसला हो रहा है।

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हाल में याद होगा जब लगातार आश्वासन दिया जाता था कि जिले में रेल का कार्य प्रगति पर है लेकिन एक आरटीआई से जब पता चला कि रेल का काम स्थगित कर दिया गया है। उसके बाद भी यहां के लोगों के रहनुमा कहे जाने वाले लोगों को फर्क नहीं पड़ा युवाओं ने काफी आंदोलन किया लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर तले रेल के मुद्दा पर अब तक आंदोलन नहीं हुआ है। इसी प्रकार डिग्री कॉलेज के मुद्दे पर भी अब तक विपक्ष भी सड़क पर नहीं आया है और सत्ताधीश भी मस्त हैं क्योंकि सभी जानते हैं कि नेताओं के लिए सत्ता का मतलब क्या होता है। अब ऐसे में युवाओं का दायित्व बनता था कि इन तमाम मुद्दों पर एक निर्णायक क्रांति किया जाए लेकिन शिवहर से किसी को क्या लेना है। महत्वकांक्षा महत्वपूर्ण है ऐसे में क्यों न कहा जाए कि हमारा जिला अनाथ है और शिवहर के अनाथ होने की खबर दिल्ली और पटना में बैठे राज्य तथा देश के राजाओं को बखूबी पता है। शहर में चौक चौराहे पर कानाफूसी का दौर जारी है कि रेल छीन लिया गया, डिग्री कॉलेज खोलने के बाद बंद कर दिया गया, एम्स आते आते रह गया, अस्पताल में कोई विशेष सुविधा है नहीं, किसी में जिले विस्तार करने की क्षमता है नहीं। कहीं ऐसा ना हो सरकार कुछ दिन बाद शिवहर के जिला का मान्यता भी छीन ले? हालांकि यह कानाफूसी की जगह क्रांति की जरूरत थी लेकिन जिला छोटा है, व्यक्तिगत संबंध लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, कोई किसी के खिलाफ खुलकर आने को तैयार नहीं है। ऐसे में क्यों न कहा जाए कि व्यक्तिगत संबंध बचाने के चक्कर में शिवहर का यह स्थिति हो रहा है। हालाकि सबको इंतजार है कि जिले के में एक क्रांतिवीर का जो आए और तमाम तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं लेकिन एक कहावत है कि भगत सिंह तो सबको चाहिए लेकिन पड़ोसी के घर में

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