जब शिक्षक ही पढाई को लेकर सवाल करे तो बेचारे छात्र क्या करे !

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मोहम्मद हसनैन की रिपोर्ट

शिवहर :शिवहर जिले से एक शिक्षक अजय सिंह ने अपने दर्द को कुछ इस तरह सुनाया, शिवहर जिले मे यदि किसी पदाधिकारी द्वारा इसका संज्ञान लिया गया है तो यह वाकई प्रशंसा योग्य हैं. पर क्या वाकई शिवहर जिला प्रशासन शिवहर जिला में विद्यालयों की स्थिति में सुधार लाना चाहते हैं? आपकी क्या राय है,

सवाल,1. क्या कुव्यवस्था पर सवाल खड़ा कर देने मात्र से ही आप शिक्षा में सुधार लानेवाले नायक बन गए हैं? मुझे तो आपकी कार्यप्रणाली पर तरस आती है.
सवाल ,2. एक दिन में ही पूरी व्यवस्था खराब नहीं हो गई और जब ये खराब होती जा रही थी उस समय शिवहर पदाधिकारियों से विहीन था ऐसा भी नहीं है. चलिए, आज आपकी आँख खुली है. पर क्या इसके लिए सिर्फ हेडमास्टर ही जिम्मेबार होता है,

सवाल,3. एक हेडमास्टर के पास सिर्फ कर्तव्य होता है लेकिन अधिकार के नाम पर कुछ नहीं. मेरा प्रत्येक शिक्षक मुझसे कहीं ज्यादा आपके निकट रहनेवालों के सम्पर्क में रहता है. यदि वह बात न माने तो एक प्रधानाध्यापक अभयदान प्राप्त लोगों का क्या बिगाड़ सकता है?
सवाल , 4. किसी भी मुज़रिम को अपना पक्ष दंड देने से पहले अपना पक्ष रखने का हक़ है पर आपके शासन में तो फरियादी का बिना फरियाद से सुने मुज़रिम करार दे दिया जाता है वो भी बिना बात सुने.

सवाल ,5. शिवहर जिला के पदाधिकारीगण अच्छे हैं, लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि उने के आसपास जो लोग रहते हैं जिसे वे अच्छे मानते हैं वे भी अच्छे हैं?

सवाल,6. यदि कोई कर्मी अपने क्षेत्र में जाकर काम करेगा तो वह आपके पीछे क्यों घूमता रहेगा.

सवाल ,7. यदि आप वाकई न्याय करना चाहते हैं तो पहले दोनों पक्षों को सुनिए. फिर फैसला कीजिए. सिर्फ एक पक्ष के लोगों ने कुछ कह दिया और आपने दूसरे को सजा दे दी. जो निर्दोष सजा काटेगा उसकी और उसे जाननेवालों की नजर में आपकी शाख का क्या होगा?

सवाल ,8. जितने नियम-क़ानून हैं, हर बात को ध्यान में रखकर यदि आप शिवहर जिले के विद्यालयों का औचक निरीक्षण करेंगे तो शायद पाँच – दस विद्यालय ही खुले रहेंगे शेष सभी बंद हो जाएँगे और सारे लोग सस्पेंड हो जाएँगे? क्या इससे शिक्षा के सार्वजनिकीकरण का उद्देश्य पूरा हो जाएगा,

सवाल,9. जो सही करेगा, सही बोलेगा, सही सोंचेगा – वो मुज़रिम.लरार दिया जाएगा. जो पैसे कमाएगा, चोरी करेगा, वो विद्यालय को बर्बाद कर देगा – वो खूब मजे में रहेगा और काम करनेवाले को अंगूठा दिखाएगा. आपके बिना सोंचे-समझे, बिना जाँचे सजा दिए जाने से शेष शिक्षकों में क्या संदेश जाता है श्रीमान? इसे भी तो सोंचिए! शिक्षकों को ऊपरवाले से डरने की सलाह देते हैं, क्या आपको उनसे डर नहीं लगना चाहिए?
अधिक-से-अधिक मेरा क्या होगा – नौकरी जाएगी और क्या?
फिर भी
मेरी कम-से-कम एक बात सुन लीजिए.
यदि एक पदाधिकारी वास्तव में शिवहर में शिक्षा-व्यवस्था सुधारना चाहते हैं जो सबसे पहले जाचकर दोनों पक्षों के बातो को सुने फिर जो सजा हो दिया जाए, बिना पक्ष सुने मुझे सस्पेंड कर दिया गया,अजय सिंह, फरियादी शिक्षक शिवहर, प्रधानाध्यापकों को मजबूत बनावें कारण कि विद्यालय की परिस्थितियों को वास्तव में उन्हीं को झेलना पड़ता है. विद्यालय में काम करनेवाले शिक्षकों को महत्व दे, कार्यालयों की दरबानी करनेवाले शिक्षकों को तिरस्कृत करें. बिना मतलब सस्पेंड करना बंदकरें. पहले स्पष्टीकरण पूछें, फिर फैसलें लें. अजय सिंह आप से एक बार फरीयाद करता हु के आदरणीय शिक्षा विभाग मेरे पक्षों को एक बार जरुर सुने वास्तव मे मै मुज़रिम हु तो सजा दिजिए आप का फरीयादी शिक्षक अजय सिंह शिवहर।