’प्लेस ऑफ सेफ्टी’ के पर्यवेक्षण गृह से भाग निकले नौ बाल कैदी, CCTV भी मिला बंद,

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शेखपुरा। बिहार में बाल कैदियो को रखने को लेकर राज्य का पहला ’प्लेस ऑफ सेफ्टी’ बनाया गया था। लेकिन कानून के राज में उसकी सिक्योंरिटी में भी संध लग गई है। ख्बर आ रही है कि शेखपूरा के इस ’प्लेस आॅफ सेफ्टी’के पर्यवेक्षण गृह बिहार के विभिन्न जिले के रहनेवाले नौ बाल कैदी फरार हो गए हैं।

जनकारी के अनुसार घटना मध्यरात्रि का है। करीब एक बजे घटी इस घटना के कारण को जानने को लेकर डीएम योगेंद्र सिंह और एसपी दयाशंकर पर्यवेक्षण गृह में फिलहाल कैंप कर जांच में लगे है। सूचना के अनुसार जो बाल कैदी भागे है उनमें सबसे अधिक छपरा जिले के है। यहा के चार बाल कैदी फरार हुए हैं। वही गया के एक बाल कैदी के अलावा बक्सर और भोजपुर जिले के कैदी बताये गये हैं। बता दे कि फरार कैदी अपने वार्ड के बाहर बरामदे में सो रहे थे।

बाल कैदियों की निगरानी में लगे सीसीटीवी को जब खंगाला गया तो ता चला कि ये भी 1 बजे के बाद बंद हो गया था। सहायक निदेशक बाल संरक्षण प्रमोद कुमार ने इस बारे में बताया कि पड़ताल के लिए सीसीटीवी कैमरे को खंगाला गया है। रात्रि एक बजे के बाद कैमरा बंद पाया गया है। यह जांच का विषय है कि कैमरे को कैसे ठप कर दिया गया। कैमरे में रात्रि एक बजे तक फरार कैदियों की गतिविधि देखी गयी, लेकिन उसके बाद वे कैसे फरार हो गये, इसकी तस्वीर पांच घंटे की जांच में अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने कैदियों से संबंधित थानों को बाल कैदियों की सूची, तस्वीर और अन्य सूचनाएं उपलब्ध करा दिए हैं और अलर्ट जारी कर दिया है। आपको बता यह ’प्लेस ऑफ सेफ्टी’ शेखपुरा जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर पश्चिम मटोखरदह पर छह माह पूर्व से संचालित है।

क्या कहते हैं अधिकारीः- इस पूरे मामले को लेकर एसडीपीओ अमित शरण ने कहा कि पर्यवेक्षण गृह में चार सैप जवान और एक एएसआई सुरक्षा में तैनात रहते हैं। इस घटना में शेखपुरा शहर के मकदूमपुर निवासी चैकीदार अशोक कुमार के पास ही सारी चाबियां रहती थीं। ऐसे में सुरक्षा बल और कर्मियों की भूमिका को संदिग्ध रुप से देखा जा रहा है। ’प्लेस ऑफ सेफ्टी’ में बंद बाल कैदियों और कर्मियों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल बाल कैदियों के भागने की घटना के बाद पिछले हिस्से में दीवार से लटके मिले चादर को संदेह के घेरे में लिया गया है. कर्मियों ने बताया कि पर्यवेक्षण गृह कैद 24 बाल कैदियों को रात्रि 10रू30 बजे खाना खिलाकर सुलाया गया था।

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