गौड़ीशंकर धाम में चार दिवसीय शिवरात्री महोत्सव सम्पन्न

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झंझारपुर अनुमंडल के जमुथरि गांव के लोग शिवरात्रि का चार दिनों तक महोत्सव के रुप में मनाते है। नाटक, संस्कृति कार्यक्रम के अलावा मंदिर परिसर शिव भक्ति में डूबा रहा। महोत्सव को ले दूर दूर से काफी लोगो का जूटान होता है। कई तरह के धार्मिक कार्यक्रम का भी आयोजित किया जाता हैं। गौरीशंकरधाम में चार दिवसीय शिवरात्रि महोत्सव का भव्य समापन शनिवार की देर रात हुआ। कई पौराणिक आस्था को समेटे हुए यह मंदिर सम्पूर्ण मिथिला के मध्य में स्थित है। रात्रिकालीन समय में नाट्यकला परिषद द्वारा यहाँ ऐतिहासिक धार्मिक व सामाजिक नाटकों का मंचन किया गया। जिसमें विद्यापतिक भक्त उगना, राजा भर्थरिहरि के अलावा अन्य नाटक का मंचन किया गया। नाट्य परिषद पिछले लगातार 38बें बर्ष भी नाट्य जैसी लुप्त होती जा रही कला को जीवन्त बनाए रखने की प्रतिबद्धता बनाए रखा है। शिवविवाह से लेकर शिवचतुर्थी तक का यह पर्व यहां करीब चार दशक से मनाया जा रहा है। गांव के विद्वान साहित्यकार आचार्य यन्त्र नाथ मिश्र रचित पुस्तक गौरीशंकर दर्शन के मुताबिक यह पवित्र स्थान भारत और नेपालीय मिथिला के मध्य स्थित है। जिसकी स्थापना नान्यवंशीय राजा रामसिंह देव द्वारा बर्ष 1229 ई़ में किया गया है। यहा गौरीमुख शिवलिंग, जलधरी और उसमें उकेर कर लिखा हुखा हुआ शिलालेख यहां की महत्ता को दर्शाता है। इन्ही विशिष्टताओं के चलते यहाँ लोगों की आस्था दिनानुदिन बढती ही जा रही है। लोगों की बढती आस्थाओं का परिणाम है कि शिवरात्रि के दिन और उसके अगले दिन पूजन और दर्शनार्थियों की संख्या बीस हजार से ऊपर आंकि गई। नाट्य क्षेत्र में सफलतम योगदान देने बाले अमर नाथ झा, विनोदानन्द भावे, सुमन झा, दयाशंकर झा, उमाशंकर झा, शेषनाथ मिश्र, विमलजी झा, कमलजी झा सहित दो दर्जन लोगों नाम श्रद्धा से लोग लेते है।

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