15 दिवसीय परिक्रमा यात्रा को ले रवाना हुआ साधू संतो का जत्था।

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रंजीत मिश्रा की रिपोर्ट

विश्व ख्याति प्राप्त मिथिलांचल क्षेत्र् के 15 दिवसीय परिक्रमा यात्रा गुरुवार को पड़ोसी देश नेपाल के कचुरी स्थान से साधू संतो का जत्था मिथिला बिहारी एवं जनकपुरधाम से किशोरी जी का डोली के साथ लाखों लोग चल पड़े हैं। जिसमे किशोरी जी के डोला के आगे लाल व मिथिला बिहारी के आगे पिला झंडा डोली का पहचान चिन्ह होता है। हर साल की भाँति इसबार भी लाखों भक्त व साधू संत जनकपुर धाम से डोली के साथ निकले हैं।ए सभी भक्त गुरुवार की रात्रि हनुमानगढ़ी में सभी परिक्रमा यात्री विश्राम करते हुए। हनुमानगढ़ी पहुचने पर दोनों डोली का भव्य स्वागत स्थानीय ग्रामीणों द्वारा किया गया। रात भर चले भजन कीर्तन में लोग भाव विभोर होते रहे। भक्तो के बिच डोली का एक झलक पाने के लिए आपा धापी का माहौल देखा गया। परिक्रमा यात्रा में देश के विभिन्न हिस्से जैसे अयोध्या, गुजरात, सीता मढ़ी वृंदावन, मथुरा, प्रयाग सहित दर्जनों तीर्थ स्थल के साधु संत परिक्रमा यात्रा में शामिल हुए हैं। शुक्रवार की सुबह बिहार के हरलाखी प्रखंड के हरिणे गांव डोली अपने पुरे लाव लश्कर के साथ पहुंचेंगी। जहाँ भारतीय सीमा क्षेत्र् में हरिणे के ग्रामीणों द्वारा डोली का भव्य स्वागत की तैयारी की गई है। जिसकी जानकारी देते हुए हरलाखी के मुखिया दयानंद झा ने बताया दिन का विश्राम व भोजन परिक्रमा में चलने वाले भक्त हरिणे में ही करेंगे। उसके बाद हरलाखी के पोतगाह गांव होते हुए कल्याणेश्वर स्थान में शुक्रवार को पहुंचकर रात्रि विश्राम करेंगे। शनिवार की सुबह कलना से विधिवत संकल्प के साथ परिक्रमा यात्रा फुलहर स्थित गिरिजास्थान के लिए प्रस्थान करेगी । 15 दिवसीय परिक्रमा यात्रा में 15 देव स्थल का दर्शन होता है। हर ठहराव स्थल पर तैयारी पूरी होने की जानकारी वहाँ के स्थानीय कमिटी ने दी है।

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