#happybirthdaydada : शर्ट उतारकर लहराने से लेकर चैपल विवाद तक दादा गांगूली की कहानी

saurabh-ganguly
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नई दिल्ली। आज भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली जिन्हे उनके फैन्स दादा नाम से भी जानते हैए का जन्म दिन है। गांगुली आज 46 बरस के हो चुके हैं। वैसे तो दादा भारमिततय क्रिकेट में कई मायनो से जाने जाते है लेकिन उनकी ज्यादात्तर चचा्र दो कारणो से लेकर होती है। पहला की वे भारतीय कप्तानों में सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे वहीं उन वक्त के कोच ग्रैग चैपल जिनके साथ उनका विवाद मीडिया में भी बहुत छाया रहा।

बंगाल के रहनेवाले गांगूली को उनके टीम मेंट प्यार से दादा कहते थे। आज भी उनके साािी खिलाडियो से लेकर मौजूदा खिलाड़ियो और फैन्स तक उन्हे दादा के ही नाम से जानते हैं। सौरव गांगुली भारतिय टीम के लिए वो पहले कप्तान थे जिसने इस अीम को विदेशी सरजमी पर मैंच जितना सिखाया। सौरभ एक सफल लेफ्ट हेण्ड बल्लेबाज़ ही नहीं बल्कि एक शानदार और सफल गेंदबाज भी रहे।

बड़े भाई ने क्रिकेट खेलने को किया प्रेरित:- गांगूली बचपन से ही क्रिकेट खेलना चाहते थे। लेकिन उनका परिवार जो कोलकाता का संपन्न परिवार थाएये नही चाहते थे कि दादा क्रिकेट खेंले। लेकिन सौरभ के बड़े भाई स्नेहाशीश ने उनके हुनर को पहचाना और उनकी क्रिकेट में रुचि को पहचानते हुए उनके माता पिता से उन्हे क्रिकेट कोचिंग दिलावाने का आग्रह किया। उस वक्त सौरव 10वीं कक्षा में पढ़ते थे

ganguly-with-team
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सफल रहा इंग्लैंड का दौराः- सौरभ गांगूली के लिए सबसे बड़ा मैच 1996 का रहा जब वे टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर गये थे। यहां उन्होने यहां उन्होंने सचिन तेंदुलकर के साथ 255 रन की साझेदारी करते हुए शतक जड़ा और टीम का हिस्सा बन गए।इसके अलावा गांगुली ने द्रविड़ के साथ मिलकर 1999 के क्रिकेट विश्व कप में 318 रन की साझेदारी की जो की आज भी विश्व कप के इतिहास में सर्वाधिक है।

2000 में बने कैप्टनः- सन 2000 में टीम के कइ्र प्लेयरो पर फिक्सिग का आरोप लगा और इसी समय खराब तबियत के कारण सचिन ने टीम का कप्तान बने रहने से मना कर दिया ए तक सौरभ को भारतीय टीम की कमान सौपी गई। सौरभ उन दिनो अच्व्छे फार्म में चल रहे थे। लेकिन जल्द ही गांगुली को काउंटी क्रिकेट में डरहम की ओर से खराब प्रदर्शन और 2002 में नेटवेस्ट फायनल में शर्ट उतारने के कारण मीडिया में तिखी आलोचनाओ का सामना करना पड़ा। लेकिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियो के बीच दादा की दीवानगी कम नही उई।

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सौरव के लिए सबसे बड़ी मैच सीरीज 2003 विश्व कप रहा जिसमें उनकी कप्तानी में टीम ने टूनामेंट में खराब शुरूआत के बाद भी फाइनल तक का सफर पूरा किया। इस मैच में भारतिय टीम फाईनल का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से हार गई। उसी वर्ष बाद में खराब प्रदर्शन के कारण सौरव गांगुली को टीम से निकला गया।

ganguly-and-dhoni
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2005 में दादा को देश के उच्च सम्मानो मे से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 2006 में दादा ने टीम में जोरदार वापसी की और बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसी समय वे भारत के कोच ग्रेग चैपल के साथ विवादों में आये। गांगुली पुनः टीम से निकाले गए लेकिन 2007 क्रिकेट विश्व कप में खेलने के लिए चयनित हुए।

विवादों से रहा है नाताः- यू तो सौरभ का करियर क्रिकेट के कई किर्तिमाना से भरा पड़ा है लेकिन इनमें विवाद भी कम नही है। सौरव गांगुली के कैरियर में भारतीय क्रिकेट टीम के तत्कालीन कोच कोच ग्रेग चैपल से उनके विवाद तो जतग जाहिर हैं। इसी विवाद के कारण सौरव गांगुली के कैरियर का अंत हो गया।

हालांकि आपको बता दे कि चैपल को टींम का कोच बनाने की वकालत खुद दादा ने ही की थी लेकिन जलद ही दोनो के बीच की दूरियां बढ़ती गई। दोनो के बीच की लड़ाई मीडिया में भी खुलकर सामने आई। दोनो के बीच का विवाद जिम्बाबें टूर के समय खुल कर सामने आया जब चैपल का लिखा एक मेंल लीक हों गया जिसमें उन्होने बीसीसीआई को गांगूली के बारे में लिखते हुए उन्हे मेंटली औरं फिजीकली अपफिट बताया था। चैपल ने अपने मेंल में लिखा था थी गांगूली का नकारात्मक रवैया टीम के लिए नुकसान दायक हो सकता है।

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ये विवाद तब और पूरी तरह से सामने आ गया जब लेग स्पिनर हरभजन सिंह ने गांगूली का बचाव करते हुए चैपल पर खुलकर हमला बोला था। भज्जी ने कहा था कि चैपल एक डबल स्टैडर्रड के आदमी है जिनके कारण टीम में असुरक्षा और भय का माहौल है। उस समय टीम के कई साथी खिलाड़ी थे। चैंपल के बर्ताव से खुश नही थे।

 

कोल

ganguly-and-kohali
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कत्ता के लोगो में गांगूली के प्रति चैंपल के व्यवहार को लेकर काफि गुस्सा था। आलम ये था जब साउथ अफ्रिका के साथ हो रहे मैच में गांगूली को बाहर कर दिया गया तो लोंगो का गुस्सा फूट पड़ा। स्टेडियसम से बाहर लोंगो ने टीम की बसो को रोकने की कोशिश की ए वही उस दिन के अखबारो के अनुसार बस में से किसी ने मिडिल फिगंर का इशारा किया जो शायद चैपल का थाए इसी कारण लोंगो का गुस्सा फूट पड़ा और स्टेडिय में लोगो ने टीम का सपोर्ट नही किया।

हालाकि दोनो के बीच का विवाद ग्रेग चैपल के पद से हटाने पर खत्म हो गया। बोर्ड ने जैसा कि डिसाईड किया था की 2007 बल्र्ड कप में टीम का प्रदर्शन ही चैंपल के भविष्य का निर्धारण करेंगा। इस वक्त तक टीम में गांगूली की वापसी हुई थी। लेकिन टीम टूनामेंट में अच्चा प्रदर्शन नहीं कर सकी और पहले ही राउंड में बाहर हो चली। जिसके कारण चैप्पल को कोच के पद से हटना पड़ा।

2007 में गांगूली के क्रिकेट का करियर का अंतिम दौर रहा। गांगूली इस समय अच्छे फार्म में रहे। 2007 में 66.1 की औसत से टेस्ट मैंचो में 1106 रन बनाए। वे इस साल जैक कालिस के बाद दूसरे सबसे ज्यादा टेस्ज्ञट मैच स्कोरर रहे। वही इस दौरान वे बनडे मैंचो में सबसे ज्यादा रन बनाने वालो की लिस्ट में 5 वे नंबर पर रहे। वनडे में उन्होने 44.28 की औसत से 1240 रन बनाए। गांगूली ने 2008 में आॅफिसियल तौर पर अंतराष्ट्रय मैचो से संन्यास ले लिया।

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सन 2007 में चैपल को लोंगो के गुस्से का शिकार हाना पड़ा। उस समय भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर दादा के किसी प्रसंसक ने चैपल के कान के नीचे लोर का चोट किया था। चैपल ने तब अपनेआप को नश्ल भेद का शिकार बताया थाए लेकिन बाद में उन्होने अपने ये शब्द वापस ले लिए। सचिन ने अपनी किताब प्लेइंग इट इन माॅय वे में चैपल को अपने हिसाब से काम करनेवाला बताया है। जिसे खिलाड़ियो के कम्फर्ट से कोई लेना देना नहीं था। सचिन ने यह भी लिखा कि 2007 विश्वकप से पहले चैपल उनके घर आए थे और उन्हे टीम की कप्तानी अपने हाथ मे ंलेने को कहा था और यह भी कहा था की ऐसा करने से वे दोनो मिलकर कई दिनो तक टीम पर अपना राज जमा सकते है।

गांगूली उन खिलाड़ियो में से रहे जिनके साथ देश का एक भावनात्मक जुड़ाव रहा। जिनके समर्थन में उनके घर से लेकर राज्य और देश के अलग हिस्सो में लोंगो ने प्रदर्शन किया। यहा तक की देश के संसद में भी उनके समर्थन में भी भाषणे दी गई। भले ही आज सौरभ गांगूली हर प्रकार के क्रिकेट से संन्यास ले चुके है लेकिन उनके आज भी कई प्रसंशक है। वही आज की पूरी टीम भी दादा को अपना मेंटर मानती है। दादा अभी बंगाल क्रिकेट एशोसियेसन के अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे हैं।

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